नए साल पर किम जोंग ने अमेरिका को दी धमकी

इस नए साल के मौके पर उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अमेरिका को धमकी दी है। 

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और उनके पागलपन कानपुरी दुनियाँ जानती है। तो इस नए साल के भासड़

में उत्तरी कोरियाई तनाशाह किम ने एक बार फिर अमेरिका को धमकी दी है।

और कहा है की अगरअमेरिका उत्तरी कोरिया पर लगाए गए प्रतिबन्ध हटाने के बारे में नहीं सोचता है तो हम भी शांति का रास्ता छोड़ देंगे। क्योकि यह देश की सुरक्षा और हितो के लिए जरुरी है। 2018 में 12 जून को किम और ट्रम्प की पहली बार मुलाकात सिंगापूर में हुई और इसपर बात चित हुई थी। इसमें उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकने पर सहमत हुआ। दोनों देशो के नेताओ के वार्तालाप होने के बाद से उत्तरी कोरिया ने कोई मिसाइल परिक्षण नहीं किया। लेकिन अमेरिका ने प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं की। किम ने कहा की “अमेरिका को अपना वादा पूरा करना चाहिए था “किम ने अपने देश के टेलीविजन पर कहा -अगर अमेरिका आगे आकर उत्तरी कोरिया पर लगा प्रतिबन्ध नहीं हटाता है और हमपर दबाव बनाये रखता है तो हमें भी अपना रास्ता बदलना पड़ेगा। क्योकि यह देशहित और संम्प्रभुता के लिए जरुरीहै

किम के अनुसार – मै ट्रम्प के साथ दोबारा बातचीत के लिए तैयार हु ताकि सही रणनीति बनाकर भविष्य को बेहतर

बनाया जा सके और मुझे लगता है की पूरी  दुनिया इसका स्वागत करेगी। तानाशाह किम ने  यह भी कहा की

अमेरिका और दक्षिण कोरिया को मिलाकर संयुक्त युद्धाभ्यास नहीं करना चाहिए। क्योकि इससे तनाव बढ़ता है।

दक्षिण कोरिया में 28500 अमेरिकी सैनिक है जो सही नहीं है किम ने सिंगापूर वार्ता को याद दिलाते हुए कहा की ट्रम्प ने बातचित को सफल बताया था। और दोनों नेताओ ने सकारात्मक विचार साझा किये थे। अतः ट्रम्प को उसे भूलना नहीं चाहिए। क्योकि सिंगापूर में दोनों नेताओ ने पूर्ण सहमति के समझौते पर दस्तखत किये थे।

आगे तानाशाह ने यह भी कहा 

उसके बाद नार्थ कोरिया और अमेरिका के बिच परमाणु हथियार कार्यक्रम खत्म को लेकर कोई खास बातचीत नहीं हुई।

न ही कोई रणनीति बनी ट्रम्प ने पिछले साल अमेरिकी बिदेश मंत्री का प्योंगयांग दौरा यह कह कर रद्द करदिया 

की जब मामले में कोई खास तरक्की नहीं हुई तो वहाँ जने से क्या फायदा। 

क्यों लगाए गए उत्तर कोरिया पर प्रतिबन्ध 

बता दे की उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा कई प्रतिबन्ध लगाए गए हैं। इस कारण उसके परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइलों और हथियारों के कार्यक्रमों पर रोक लगी हुई है। उत्तर कोरिया अब तक हइड्रोजन बम समेत 6 परमाणु हथियारों का परिकक्षण और कई मिसाइले का टेस्ट कर चूका है। ट्रम्प ने जून 2018 में हुई सिंगापूर सिंगापूर शिखर वार्ता का हवाला देते हुए यह भी कहा की हमारी बातचित सफल रही थी ‘रचनात्मक विचारों का आदान-प्रदान किया गया ‘उस दौरान दोनों नेताओं ने कोरियाई प्रायदीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, लेकिन वाशिंगटन और प्योंगयांग के बीच उसके सही अर्थ को लेकर चल रही बहस के कारण यह बाधित है। साउथ कोरिया और अमेरिका के बीच एक सुरक्षा समझौता है, इसके तहत वाशिंगटन ने दक्षिण कोरिया को साउथ कोरिया से सुरक्षा देने के उदेश्य से 28500 अमेरिकी सैनिक साउथ कोरिया में तैनात किये है।

जिसे  नार्थ कोरिया हटाना चाहता है।

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